यदि कोई मनुष्य समुद्र के बीच में गिर जाता है तो वह जल्दी से डूब जाता है, जबकि मछली उन्हीं लहरों में खेलने में खुशी का अनुभव करती है। इसी तरह, बंधी हुई आत्माएँ भौतिक अस्तित्व के समुद्र में गिर गई हैं और अपनी पापपूर्ण गतिविधियों की प्रतिक्रियाओं में डूब रही हैं, जबकि भक्त इस दुनिया को प्रभु की शक्ति के रूप में पहचानते हैं और भगवान कृष्ण की प्रेममयी सेवा में पूरी तरह से संलग्न हो कर इसके भीतर सुखद शगल का आनंद लेते हैं।
