मायाध्यक्षेण प्रकृतिः
सूयते स-चराचरम्
हेतुनाननेन कौंतेय
जगद् विपरिवर्तते
“हे कुन्ती之子, ये भौतिक प्रकृति मेरे निर्देशन में कार्य कर रही है और सभी चर-अचर प्राणियों को उत्पन्न कर रही है। उसके नियम के अनुसार यह प्रकटीकरण बार-बार बनाया जाता है और फिर नष्ट हो जाता है।” उसी प्रकार, चैतन्य महाप्रभु ने यह आदेश दिया है कि पूरे विश्व के सभी लोगों को कृष्ण भावना को ग्रहण करना चाहिए। भगवान के सच्चे भक्तों को पूरे विश्व में भगवान के आदेश को दोहराते हुए जाना चाहिए। इस प्रकार, वे उनके उन अद्भुत ऐश्वर्य में भागीदार बन सकते हैं जो आदेश देने के बाद उसे रद्द नहीं किया जा सकता।
