श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर बताते हैं कि यह श्लोक भगवान के परम व्यक्तित्व को भूलने की विविधताओं का वर्णन करता है। विभिन्न वैदिक मंत्र और अनुष्ठान विशेष रूप से पूरे ब्रह्मांड में बुद्धिमान प्राणियों की विभिन्न प्रजातियों के लिए हैं; लेकिन वैदिक सूत्रों के इस प्रसार से केवल भौतिक भ्रम की विविधता का संकेत मिलता है, अंतिम उद्देश्य की विविधता का नहीं। कई वैदिक विधियों का अंतिम उद्देश्य एक है - भगवान के परम व्यक्तित्व को जानना और प्यार करना। स्वयं भगवान श्री उद्धव को इसे स्पष्ट रूप से समझा रहे हैं।
