श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 14: भगवान् कृष्ण द्वारा उद्धव से योग-वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  11.14.43 
तत् सर्वव्यापकं चित्तमाकृष्यैकत्र धारयेत् ।
नान्यानि चिन्तयेद् भूय: सुस्मितं भावयेन्मुखम् ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
तब अपनी चेतना को दिव्य शरीर के सभी अंगों से हटा ले। उस समय में केवल भगवान के अद्भुत मुस्कराते चेहरे का ध्यान करना चाहिए।
 
तब अपनी चेतना को दिव्य शरीर के सभी अंगों से हटा ले। उस समय में केवल भगवान के अद्भुत मुस्कराते चेहरे का ध्यान करना चाहिए।
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