इसलिए मनुष्य को उत्थान की उन सभी भौतिक प्रक्रियाओं को त्याग देना चाहिए जो सपने की कल्पनाओं के समान हैं, और मन को पूरी तरह से मुझमें लीन कर देना चाहिए। लगातार मुझ पर मनन करने से मनुष्य शुद्ध हो जाता है।
इसलिए मनुष्य को उत्थान की उन सभी भौतिक प्रक्रियाओं को त्याग देना चाहिए जो सपने की कल्पनाओं के समान हैं, और मन को पूरी तरह से मुझमें लीन कर देना चाहिए। लगातार मुझ पर मनन करने से मनुष्य शुद्ध हो जाता है।