श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 13: हंसावतार द्वारा ब्रह्मा-पुत्रों के प्रश्नों के उत्तर  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  11.13.4 
आगमोऽप: प्रजा देश: काल: कर्म च जन्म च ।
ध्यानं मन्त्रोऽथ संस्कारो दशैते गुणहेतव: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
धार्मिक शास्त्रों की गुणवत्ता, जल, बच्चों या सामान्य लोगों के साथ संगति, विशेष स्थान, समय, गतिविधियाँ, जन्म, ध्यान, मंत्रों का उच्चारण और शुद्धिकरण संस्कार के अनुसार, प्रकृति के गुण अलग-अलग तरीकों से प्रमुखता प्राप्त करते हैं।
 
The qualities of nature gain prominence in different ways according to the qualities of scriptures, water, association with children or people, specific places, time, deeds, birth, meditation, chanting of mantras and rituals.
तात्पर्य
ऊपर बताई गई दस वस्तुएँ श्रेष्ठ व निम्न गुणों वाली हैं तथा उन्हें सत्व, रजो या तमो गुण युक्त करके पहचाना जा सकता है। सत्व गुण को धर्म ग्रंथों, शुद्ध जल, सत्व गुण वालों से मित्रता आदि में निहित रहने वाले सत्व गुण को बढ़ाया जा सकता है। प्रकृति के निम्न गुणों से प्रदूषित इन दस वस्तुओं में से किसी भी वस्तु को चुस्ती से बचना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)