कहना चाहिए कि यह भौतिक जगत मन में प्रकट होने वाला एक स्पष्ट भ्रम है, क्योंकि भौतिक वस्तुओं का अस्तित्व अत्यंत क्षणिक है और वे आज हैं, लेकिन कल नहीं रहेंगी। इनकी तुलना चमकदार डंडे को घुमाने से बने लाल रंग के गोले से की जा सकती है। आत्मा स्वभाव से एक ही विशुद्ध चेतना के रूप में विद्यमान रहता है। लेकिन इस जगत में वह अनेक रूपों और अवस्थाओं में प्रकट होता है। प्रकृति के गुण आत्मा की चेतना को जाग्रत, सुप्त और सुषुप्त, इन तीन अवस्थाओं में बाँट देते हैं। लेकिन अनुभूति की ऐसी विविधताएँ वस्तुत: माया हैं और इनका अस्तित्व स्वप्न की तरह ही होता है।
One must see that the material world is a pure illusion in the mind, for material things exist only temporarily and are here today but gone tomorrow. They may be compared to a red ball formed by the turning of a stick. The Self exists by nature as one pure consciousness. But in this world it appears in many forms and states. The modes of nature divide the consciousness of the Self into three states: waking, sleeping and deep sleep. But these variations of perception are in reality an illusion and exist only like dreams.
तात्पर्य
प्रभु अब भौतिक मन और भौतिक संवेदनशील वस्तुओं की भ्रामक अन्योन्य क्रिया को पार करने की एक अतिरिक्त प्रक्रिया का वर्णन करता है। लाँस का मतलब "कूदना" या "नाचना" है, और इस प्रकार मानसो विलास यहाँ इंगित करता है कि भौतिक दिमाग एक जीवन की अवधारणा से दूसरे में सतही तौर पर कूद रहा है। हालाँकि, हमारी मूल चेतना एक है (विज्ञानम एकम)। इसलिए, भौतिक दुनिया की "आज यहाँ, कल चला गया" की झिलमिलाती प्रकृति का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए और खुद को माया की भ्रामक विविधता से अलग करना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥