श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर इस संबंध में टिप्पणी करते हैं कि जिस तरह कोई जागने के बाद सपने के अनुभव को जल्द ही भूल जाता है, उसी तरह कृष्ण चेतना में एक मुक्त आत्मा वेदों द्वारा दिए गए सबसे महान पुरस्कारों में भी कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं देखती है, जैसे स्वर्गीय ग्रहों में पदोन्नति। इसलिए भगवान कृष्ण ने भगवद-गीता में अर्जुन को सलाह दी कि वे आत्म-साक्षात्कार में अडिग रहें, न कि धर्म के नाम पर किए जाने वाले फलदायी अनुष्ठानों से विचलित हो जाएं।
