“एक को यह जानना चाहिए कि जागरण सत्व से पैदा होता है, सपना रजस से आदेशित होता है, और अत्यधिक निद्रा अज्ञानता से पैदा होती है। चौथा तत्व, शुद्ध चेतना इन तीनों से अलग है और उनमें व्याप्त है।” (भाग. 11.25.20) वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ है साक्षीपन, या माया के कार्यों के साक्षी के रूप में अस्तित्व। कृष्ण चेतना के विकास से ऐसी लाभकारी स्थिति प्राप्त की जाती है।
