ग्यारहवें काण्ड के इस तेरहवें अध्याय में वर्तमान श्लोक में, भगवान कृष्ण कहते हैं कि ब्रह्मा दुर्भाग्य से अपने रचनात्मक कार्यों से भ्रमित हो गए, इस प्रकार भगवान के सभी सशक्त प्रतिनिधियों को एक गंभीर सबक प्रदान किया। यद्यपि एक व्यक्ति को भगवान की असीम सेवा में एक उच्च पद पर पदोन्नत किया जा सकता है, फिर भी किसी भी क्षण झूठे गर्व के व्यक्ति की भक्ति मानसिकता को प्रदूषित करने का खतरा होता है।
