Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.13.11: भौतिक इन्द्रियों पर नियन्त्रण न रखने वाला व्यक्ति भौतिक इच्छाओं के अधीन हो जाता है और इस तरह रजोगुण की प्रबल तरंगों से भ्रमित हो जाता है। ऐसा व्यक्ति भौतिक गतिविधियों में लगा रहता है, यद्यपि वह स्पष्ट रूप से देखता है कि इसका परिणाम भविष्य में दुख होगा। | bhagavat अध्याय 11.13: हंसावतार द्वारा ब्रह्मा-पुत्रों के प्रश्नों के उत्तर । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
करोति कामवशग: कर्माण्यविजितेन्द्रिय: ।
दु:खोदर्काणि सम्पश्यन् रजोवेगविमोहित: ॥ ११ ॥
अनुवाद
भौतिक इन्द्रियों पर नियन्त्रण न रखने वाला व्यक्ति भौतिक इच्छाओं के अधीन हो जाता है और इस तरह रजोगुण की प्रबल तरंगों से भ्रमित हो जाता है। ऐसा व्यक्ति भौतिक गतिविधियों में लगा रहता है, यद्यपि वह स्पष्ट रूप से देखता है कि इसका परिणाम भविष्य में दुख होगा।
One who does not control the material senses is overcome by material desires and thus becomes bewildered by the strong vibrations of the mode of passion. Such a person continues to perform material actions even though he clearly sees that the result will be future misery.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥