यन्निमित्त: स वै शापो यादृशो द्विजसत्तम ।
कथमेकात्मनां भेद एतत् सर्वं वदस्व मे ॥ ९ ॥
अनुवाद
राजा परीक्षित पूछते रहे : इस शाप का उद्देश्य क्या था? हे द्विजश्रेष्ठ, इसमें क्या-क्या शामिल था? और यदुओं में, जो एक ही जीवनलक्ष्य में भागीदार थे, ऐसा मतभेद क्यों उत्पन्न हुआ? कृपया, मुझे ये सारी बातें विस्तार से बतलायें।
King Parikshit kept asking: What was the purpose of this curse? O best of the Brahmins, what was it like? And how did such differences arise among the Yadavas, who shared the same life goal? Please tell me all these things.
तात्पर्य
एकटमानम् का अर्थ है कि सभी यदु एक ही विचार साझा करते थे, और वह यही था कि भगवान कृष्ण, भगवान के परम पुरुषोत्तम, उनके जीवन का लक्ष्य थे। इसलिए, परीक्षित महाराज यदुवंश के सदस्यों के बीच इतने विनाशकारी झगड़े का कोई स्पष्ट कारण नहीं देख सके और वह वास्तविक कारण जानने के लिए उत्सुक थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥