श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 90: भगवान् कृष्ण की महिमाओं का सारांश  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  10.90.50 
मर्त्यस्तयानुसवमेधितया मुकुन्द-
श्रीमत्कथाश्रवणकीर्तनचिन्तयैति ।
तद्धाम दुस्तरकृतान्तजवापवर्गं
ग्रामाद् वनं क्षितिभुजोऽपि ययुर्यदर्था: ॥ ५० ॥
 
 
अनुवाद
प्रभु मुकुंद की सुंदर गाथाओं को नित्य प्रति अधिक निष्ठाभाव से सुनने, जपने और ध्यान करने से मनुष्य ईश्वर के देवीधाम को प्राप्त कर लेता है, जहाँ मृत्यु की अजेय शक्ति का प्रभुत्व नहीं है। इस उद्देश्य से अनेक व्यक्तियों ने, जिनमें बड़े-बड़े राजा भी शामिल हैं, अपने सांसारिक घरों को त्यागकर जंगल का रास्ता अपनाया है।
 
By regularly listening, chanting and meditating on the beautiful stories of Lord Mukunda with ever greater devotion, a mortal being will attain the divine abode of the Lord, where the insurmountable power of death does not rule. For this very purpose many persons, including great kings, abandoned their worldly homes and took to the forest.
तात्पर्य
श्रीमद्भागावत के दशम स्कंध का यह छंद फल-श्रुति है, श्रवण-मात्र से ही उसे सुनने वाले को सफलता का वचन देता है। भगवद्भक्ति की प्रक्रिया भगवान के विषयक कथानकों के श्रवण से प्रारंभ होती है। जब कोई इन विषयों को विधिवत् सुन लेता है, तब वह दूसरों के लाभ के लिए उनका कीर्तन करता है और उनके सार पर मनन करता है। इससे भक्ति-मार्ग के सिद्धांतों में श्रद्धापूर्वक आस्था उत्पन्न होती है, और परिणति प्रभु कृष्ण में पूर्ण विश्वास में होती है। ऐसा अटल विश्वास किसी को प्रभु की अंतरंग सेवा करने का अधिकार देता है, और समय के साथ वह व्यक्ति प्रभु के परमधाम में अपने शाश्वत, आध्यात्मिक जीवन में प्रत्यावर्तित हो जाता है।

अपने पूजनीय प्रभु के चरण-कमलों में दशम स्कंध पर अपनी टीकाएं विनम्रतापूर्वक अर्पित करते हुए, श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती प्रार्थना करते हैं:

मद्-गवीरपि गोपालः

स्वीकुर्यात् कृपया यदि

तदैवासां पयः पीत्वा

हृषयेयुस्तत्प्रिया जनाः

"यदि गोपाल प्रभु मेरे शब्दों-स्वरूप गायों को कृपापूर्वक स्वीकार कर लेंगे, तो उनके प्रिय भक्त उनके दूध- उनके श्रवण द्वारा प्राप्त अमृत- का पान करके आनंदित हो सकते हैं।"

 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत नब्बे अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)