Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.90.46: वृष्णिजन कृष्णभावनामृत में इस कदर डूबे रहते थे कि सोते, बैठते, घूमते, बातें करते, खेलते, नहाते आदि क्रियाएं करते हुए वे अपने शरीर का ध्यान ही भूल जाते थे। | bhagavat अध्याय 10.90: भगवान् कृष्ण की महिमाओं का सारांश । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शय्यासनाटनालापक्रीडास्नानादिकर्मसु ।
न विदु: सन्तमात्मानं वृष्णय: कृष्णचेतस: ॥ ४६ ॥
अनुवाद
वृष्णिजन कृष्णभावनामृत में इस कदर डूबे रहते थे कि सोते, बैठते, घूमते, बातें करते, खेलते, नहाते आदि क्रियाएं करते हुए वे अपने शरीर का ध्यान ही भूल जाते थे।
The Vrishnis were so absorbed in Krishna consciousness that they forgot about their own bodies while sleeping, sitting, walking, talking, playing, bathing, etc.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥