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bhagavat 10.90.38: वज्र से प्रतिबाहु की उत्पत्ति हुई, जिसके पुत्र सुबाहु थे। सुबाहु का पुत्र शांतसेन था, जिससे शतसेन का जन्म हुआ।   |   bhagavat अध्याय 10.90: भगवान् कृष्ण की महिमाओं का सारांश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 90: भगवान् कृष्ण की महिमाओं का सारांश  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  10.90.38 
प्रतिबाहुरभूत्तस्मात् सुबाहुस्तस्य चात्मज: ।
सुबाहो: शान्तसेनोऽभूच्छतसेनस्तु तत्सुत: ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
वज्र से प्रतिबाहु की उत्पत्ति हुई, जिसके पुत्र सुबाहु थे। सुबाहु का पुत्र शांतसेन था, जिससे शतसेन का जन्म हुआ।
 
From Vajra was born Pratibahu, whose son was Subahu. Subahu's son was Shantasena and from Shantasena was born Shatasena.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)