Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.90.28: इस प्रकार वेदों द्वारा निर्देशित कर्तव्यों का पालन करते हुए संत-भक्तों के लक्ष्य भगवान श्रीकृष्ण ने बार-बार दिखाया कि कोई व्यक्ति घर में ही धर्म, आर्थिक विकास तथा विधिवत् इंद्रियों को तृप्त करने का लक्ष्य कैसे प्राप्त कर सकता है। | bhagavat अध्याय 10.90: भगवान् कृष्ण की महिमाओं का सारांश । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं वेदोदितं धर्ममनुतिष्ठन् सतां गति: ।
गृहं धर्मार्थकामानां मुहुश्चादर्शयत् पदम् ॥ २८ ॥
अनुवाद
इस प्रकार वेदों द्वारा निर्देशित कर्तव्यों का पालन करते हुए संत-भक्तों के लक्ष्य भगवान श्रीकृष्ण ने बार-बार दिखाया कि कोई व्यक्ति घर में ही धर्म, आर्थिक विकास तथा विधिवत् इंद्रियों को तृप्त करने का लक्ष्य कैसे प्राप्त कर सकता है।
Thus by performing the duties enjoined by the Vedas, Lord Krishna, the goal of saint-devotees, repeatedly demonstrated how one can attain the goals of religion, economic progress and regulated sense-gratification at home.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥