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bhagavat 10.90.26: जिस भगवान की असंख्य गीतों द्वारा असंख्य प्रकार से महिमा का गान होता है, वे उन सभी महिलाओं के मन को बलपूर्वक खींचते हैं, जो उनके बारे में केवल सुनती हैं। तो फिर उन महिलाओं के बारे में क्या कहा जाए, जिन्हें उनका प्रत्यक्ष दर्शन होता है?   |   bhagavat अध्याय 10.90: भगवान् कृष्ण की महिमाओं का सारांश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 90: भगवान् कृष्ण की महिमाओं का सारांश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  10.90.26 
श्रुतमात्रोऽपि य: स्‍त्रीणां प्रसह्याकर्षते मन: ।
उरुगायोरुगीतो वा पश्यन्तीनां च किं पुन: ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
जिस भगवान की असंख्य गीतों द्वारा असंख्य प्रकार से महिमा का गान होता है, वे उन सभी महिलाओं के मन को बलपूर्वक खींचते हैं, जो उनके बारे में केवल सुनती हैं। तो फिर उन महिलाओं के बारे में क्या कहा जाए, जिन्हें उनका प्रत्यक्ष दर्शन होता है?
 
The Lord, who is glorified in innumerable songs and in innumerable ways, powerfully attracts the minds of all women who merely hear about Him. Then what can be said about those women who see Him directly?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)