रानियां पूछती हैं, "क्या अजेय भगवान ठीक हैं ?"
हंस उत्तर देता है, "भगवान कृष्ण आप जैसी प्रिय पत्नियों के बिना कैसे ठीक हो सकते हैं ?"
"लेकिन क्या उन्हें वह भी याद है जो उन्होंने हममें से एक, श्रीमती रुक्मणी से कहा था ? क्या उन्हें याद कि उन्होंने कहा था, 'मैं अपने सभी महलों में आप जैसी कोई दूसरी पत्नी नहीं देखता' ?"
"उन्हें वास्तव में यह याद है, और यही कारण है कि उन्होंने मुझे यहां भेजा है। आपको सभी को उनके पास जाना चाहिए और उनकी भक्ति में लग जाना चाहिए।"
"अगर वह हमारे साथ रहने के लिए यहां आने से इन्कार करते हैं तो हम उनकी पूजा क्यों करें ?"
"लेकिन मेरी दया के सागर, आपकी अनुपस्थिति से वह बहुत दुखी हैं ! वह इस संकट से कैसे उभर सकते हैं ?"
"बस सुनो, हे मामूली स्वामी के नौकर : उन्हें बताना कि वह यहां आएं, जैसा कि उन्हें करना चाहिए। यदि वह कामुक इच्छाओं से पीड़ित हैं, तो केवल उन्हें खुद को ही दोष देना चाहिए, क्योंकि वह खुद कामदेव की शक्ति के सृजनहार हैं। हम आत्मसम्मान वाली महिलाएं उनकी उस मांग के आगे झुकने वाली नहीं हैं कि हम उनसे मिलने जाएं।"
"तो ठीक है; फिर मैं विदा लेता हूं।"
"नहीं, एक मिनट, प्रिय हंस। उनसे कहना कि वह यहां हमारे पास आएं, लेकिन भाग्य की देवी के बिना, जो हमेशा उन्हें अपने तक ही सीमित रखकर हमें धोखा देती हैं।"
"क्या तुम नहीं जानती कि देवी लक्ष्मी पूरी तरह से भगवान को समर्पित हैं ? वह उन्हें कैसे छोड़ सकती हैं ?"
"और क्या दुनिया में वह अकेली महिला हैं जो पूरी तरह से उनको बेची हैं ? हम क्या हैं ?"
