हे समुद्र-पत्नी नदियो, अब तुम्हारे कुण्ड सूख गये हैं। हाय! तुम एकदम दुबली हो गई हो और तुम्हारी कमलों की सम्पत्ति लुप्त हो गई है। तो क्या तुम हमारी तरह हो, जो मधुपति का स्नेहिल दृष्टि न मिलने से म्लान हो रही हैं?
O rivers, wives of the ocean, your pools have dried up now. Alas! You have become very thin and the wealth of your lotuses has vanished. So are you like us, who are wilting because we are not getting the loving glances of our beloved husband Madhupati, who deceives hearts?
तात्पर्य
गर्मियों के दौरान नदियों को उनके पति, सागर द्वारा बादलों के माध्यम से प्रदान की गई बरसात नहीं मिलती है। लेकिन रानियों के अनुसार, नदियों के पतलेपन का असली कारण यह है कि वे भगवान कृष्ण, जो सभी सुखों के भंडार हैं, की प्रेम भरी निगाहें नहीं प्राप्त कर पाई हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥