न चलसि न वदस्युदारबुद्धे
क्षितिधर चिन्तयसे महान्तमर्थम् ।
अपि बत वसुदेवनन्दनाङ्घ्रि
वयमिव कामयसे स्तनैर्विधर्तुम् ॥ २२ ॥
अनुवाद
हे भव्य पर्वत, तुम न तो हिलते-डुलते हो, न बोलते-चालते हो। तुम्हारे मन में ज़रूर कोई बड़ी महत्त्वपूर्ण बात चल रही होगी। या फिर क्या तुम भी हमारी ही तरह अपने सीने पर वसुदेव के प्यारे बेटे के चरण रखना चाहते हो?
O generous mountain, you are neither moving nor speaking. You must be thinking about something very important. Or do you want to hold the feet of Vasudeva's beloved son on your breasts (peaks) like us?
तात्पर्य
हिंदी- अनुवाद: यहाँ, शब्द stanaiḥ, “तुम्हारे स्तनों पर” पहाड़ों की चोटियों को संदर्भित करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥