प्रियरावपदानि भाषसे मृत-
सञ्जीविकयानया गिरा ।
करवाणि किमद्य ते प्रियं
वद मे वल्गितकण्ठ कोकिल ॥ २१ ॥
अनुवाद
हे मधुर कंठवाली कोयल! तुम उस मधुर वाणी से मधुर गीत गा रही हो, जिसे मृत्यु के मुख में पहुँचे हुए प्राणियों में भी जीवन का संचार करने की शक्ति है। तुम उसी स्वरों में गा रही हो, जिस स्वर में हमारे प्रियतम ने कभी गाया था, जिनका स्वर अत्यन्त मधुर था। कृपा करके मुझे बताओ कि मैं तुम्हें खुश करने के लिए आज क्या कर सकती हूँ?
Oh sweet-voiced cuckoo, you are speaking the same language that can revive the dead, which we once heard from our sweet-spoken lover. Please tell me what can I do today to please you?
तात्पर्य
जैसे कि श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने बताया है, हालांकि कोयल का गीत बहुत ही मनोरम होता है, भगवान कृष्ण की पत्नियों को यह पीड़ा देने वाला लगता है क्योंकि यह उन्हें उनके प्रिय कृष्ण की याद दिलाता है और उनके वियोग की पीड़ा को बढ़ा देता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥