Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.90.18: हे प्रिय चन्द्रमा, तुम घोर यक्ष्मा रोग (क्षयरोग) से ग्रसित हो, इसीलिए तुम इतने क्षीण हो गये हो कि तुम अपनी किरणों से अंधकार को दूर करने में असमर्थ हो। या फिर ऐसा तो नहीं है कि तुम इसीलिए अवाक् हो, क्योंकि हमारी तरह तुम भी मुकुंद द्वारा दिये गये, उत्साहपूर्ण वादों को याद नहीं कर सकते हो? | bhagavat अध्याय 10.90: भगवान् कृष्ण की महिमाओं का सारांश । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रिय चन्द्रमा, तुम घोर यक्ष्मा रोग (क्षयरोग) से ग्रसित हो, इसीलिए तुम इतने क्षीण हो गये हो कि तुम अपनी किरणों से अंधकार को दूर करने में असमर्थ हो। या फिर ऐसा तो नहीं है कि तुम इसीलिए अवाक् हो, क्योंकि हमारी तरह तुम भी मुकुंद द्वारा दिये गये, उत्साहपूर्ण वादों को याद नहीं कर सकते हो?
O dear Moon, you have become so emaciated by severe tuberculosis that you are unable to dispel the darkness with your rays. Or is it that you appear speechless because, like us, you too cannot recall the encouraging promises made by Mukunda?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥