प्रियस्य सन्निकर्षेऽपि
प्रेमोत्कर्ष-स्वभावतः
या विश्लेष-धियार्तिस् तत्
प्रेम-वैचित्र्यं उच्यते
"जब, किसी के अत्यधिक प्रेम के एक प्राकृतिक परिणाम के रूप में, वह प्रियतम की प्रत्यक्ष उपस्थिति में भी विरह का कष्ट महसूस करता है, तो इस स्थिति को प्रेम-वैचित्र्य कहा जाता है।"
