Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.90.13: इस तरह से भगवान श्रीकृष्ण अपनी रानियों के साथ क्रीड़ा करते थे, और अपने हाव-भाव, बातें, चितवन और हँसी और साथ ही अपने परिहास, छेड़खानी और आलिंगन द्वारा उनके हृदयों को पूरी तरह से मोह लेते थे। | bhagavat अध्याय 10.90: भगवान् कृष्ण की महिमाओं का सारांश । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस तरह से भगवान श्रीकृष्ण अपनी रानियों के साथ क्रीड़ा करते थे, और अपने हाव-भाव, बातें, चितवन और हँसी और साथ ही अपने परिहास, छेड़खानी और आलिंगन द्वारा उनके हृदयों को पूरी तरह से मोह लेते थे।
In this way, Lord Krishna, by playing with His queens and by His gestures, words, glances and laughter, and also by His jokes, teasing and embracing, completely charmed their hearts.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥