उत्तार्य गोपी सुशृतं पय: पुन:
प्रविश्य संदृश्य च दध्यमत्रकम् ।
भग्नं विलोक्य स्वसुतस्य कर्म त-
ज्जहास तं चापि न तत्र पश्यती ॥ ७ ॥
अनुवाद
चूल्हे से गरम दूध उतार कर माता यशोदा मथनी के पास लौटीं और जब उन्होंने देखा की दही की मटकी टूटी हुई है और कृष्ण वहाँ नहीं हैं, तो उन्हें समझ आ गया कि यह कृष्ण की ही करतूत है।
After taking the hot milk off the stove, mother Yashoda returned to the place where she had churned the milk and when she saw that the pot was broken and Krishna was not there, she realised that it was Krishna's doing.
तात्पर्य
हंडी टूटी हुई देखकर तथा कृष्ण के वहाँ न रहने पर यशोदा ने निश्चित रूप से निष्कर्ष निकाला कि हंडी तोड़ने का काम कृष्ण का ही है। इसमें कोई शक नहीं था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥