अद्वैतं अच्युतं अनादि अनन्त-रूपम्
आद्यं पुराण-पुरुषं नव-यौवनं च
वेदेषु दुर्लभम् अदुर्लभम् आत्म-भक्तौ
गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम अहं भजामि
(ब्रह्म-संहिता 5.33)
सब कुछ एक है क्योंकि कृष्ण हर चीज के परम कारण हैं। कृष्ण को वैदिक ज्ञान (वेदेषु दुर्लभम्) द्वारा मापा या परिकलित नहीं किया जा सकता है। वह केवल भक्तों के लिए उपलब्ध हैं (आत्म-भक्तौ अदुर्लभम्)। भक्त उनसे निपट सकते हैं क्योंकि वे प्रेममयी सेवा (भक्त्या माम अभिजानाति यावान यश्चासमि तत्त्वतः) के आधार पर कार्य करते हैं। इस प्रकार माता यशोदा उन्हें बाँधना चाहती थीं।
