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bhagavat 10.89.65: अब, उन्होंने कई दुष्ट राजाओं को मार डाला था और अन्य को मारने के लिए अर्जुन जैसे भक्तों को नियुक्त किया था, तो वे युधिष्ठिर जैसे धर्मी शासकों के माध्यम से धार्मिक सिद्धांतों के पालन को आसानी से सुनिश्चित कर सकते थे।   |   bhagavat अध्याय 10.89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  10.89.65 
हत्वा नृपानधर्मिष्ठान् घातयित्वार्जुनादिभि: ।
अञ्जसा वर्तयामास धर्मं धर्मसुतादिभि: ॥ ६५ ॥
 
 
अनुवाद
अब, उन्होंने कई दुष्ट राजाओं को मार डाला था और अन्य को मारने के लिए अर्जुन जैसे भक्तों को नियुक्त किया था, तो वे युधिष्ठिर जैसे धर्मी शासकों के माध्यम से धार्मिक सिद्धांतों के पालन को आसानी से सुनिश्चित कर सकते थे।
 
Now, since He had killed many wicked kings and engaged devotees like Arjuna to kill others, He could easily assure the accomplishment of religious principles through pious rulers like Yudhishthira.
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत नवासी अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)