किन्तु भृगु ने यह कहते हुए उनके आलिंगन का त्याग कर दिया कि आप तो विपथगामी हैं। इससे शिवजी क्रोधित हो गये और उनकी आँखें भयावह रूप से जलने लगीं। उन्होंने त्रिशूल उठा लिया और भृगु को मार ही डालते कि देवी उनके चरणों पर गिर पड़ीं और उन्होंने उन्हें शान्त करने के लिए कुछ शब्द कहे। तब भृगु वहाँ से चल पड़े और वैकुण्ठ गये, जहाँ भगवान् जनार्दन निवास करते हैं।
But Bhrigu left her embrace, saying, "You have gone astray." At this, Lord Shiva became furious and his eyes burned terribly. He took up his trident and was about to kill Bhrigu when the Goddess fell at his feet and said a few words to pacify him. Then Bhrigu left that place and went to Vaikuntha, where Lord Janardana resides.
तात्पर्य
कृष्ण में श्रील प्रभुपाद लिखते हैं: "ऐसा कहा गया है कि अपराध शरीर, मन या वाणी से किया जा सकता है। भृगु मुनि ने भगवान ब्रह्मा के प्रति जो पहला अपराध किया, वह मन से किया गया अपराध था। दूसरा अपराध, जिसमें भृगु ने भगवान शिव का अपमान करके, उनकी अशुद्ध आदतों के लिए उनकी आलोचना करके उन्हें अपमानित किया, वह वाणी द्वारा किया गया अपराध था। क्योंकि भगवान शिव में अज्ञानता का गुण प्रमुख है, जब उन्होंने भृगु के अपमान को सुना तो उनकी आँखें तुरंत क्रोध से लाल हो गईं। बेकाबू क्रोध के साथ, उन्होंने अपना त्रिशूल उठाया और भृगु मुनि को मारने की तैयारी की। उस समय भगवान शिव की पत्नी, पार्वती, उपस्थित थीं। उनका व्यक्तित्व, भगवान शिव की तरह ही, तीनों गुणों का मिश्रण है, और इसलिए उन्हें त्रिगुण-मायी कहा जाता है। इस मामले में, उन्होंने भगवान शिव के अच्छाई के गुण को उद्घाटित करके स्थिति को बचाया।"
श्रील जीव गोस्वामी ने टिप्पणी की कि यहाँ संदर्भित वैकुंठ ग्रह श्वेतद्वीप है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥