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bhagavat 10.89.50: भगवान् का सुदर्शन चक्र अपनी तेजस्वी चमक से अंधकार में घुस गया। मन की गति से दौड़ते हुए उसने आदि पदार्थ से फैले भयावह घने अंधकार को काट दिया, जैसे भगवान राम के धनुष से छूटा तीर अपने शत्रु की सेना को काटते हुए निकल जाता है।   |   bhagavat अध्याय 10.89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  10.89.50 
तम: सुघोरं गहनं कृतं महद्
विदारयद् भूरितरेण रोचिषा ।
मनोजवं निर्विविशे सुदर्शनं
गुणच्युतो रामशरो यथा चमू: ॥ ५० ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् का सुदर्शन चक्र अपनी तेजस्वी चमक से अंधकार में घुस गया। मन की गति से दौड़ते हुए उसने आदि पदार्थ से फैले भयावह घने अंधकार को काट दिया, जैसे भगवान राम के धनुष से छूटा तीर अपने शत्रु की सेना को काटते हुए निकल जाता है।
 
The Lord's Sudarshana Chakra entered the darkness with its blazing brilliance. Moving at the speed of the mind, it cut through the terrifying dense darkness that spread from the primal matter, just as an arrow shot from Lord Rama's bow cuts through his enemy's army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)