Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.89.41: "उस झूठे अर्जुन को धिक्कार है! उसके बड़बोलेपन के धनुष को धिक्कार है! वह इतना मूर्ख है कि वह यह सोचकर बहक गया है कि वह उस व्यक्ति को वापस ला सकता है जिसे विधाता ने उठा लिया है।"   |   bhagavat अध्याय 10.89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  10.89.41 
धिगर्जुनं मृषावादं धिगात्मश्लाघिनो धनु: ।
दैवोपसृष्टं यो मौढ्यादानिनीषति दुर्मति: ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
"उस झूठे अर्जुन को धिक्कार है! उसके बड़बोलेपन के धनुष को धिक्कार है! वह इतना मूर्ख है कि वह यह सोचकर बहक गया है कि वह उस व्यक्ति को वापस ला सकता है जिसे विधाता ने उठा लिया है।"
 
"Shame on that false Arjuna, shame on the bow of that self-admirer, so foolish as to be bewildered, thinking that he can bring back one whom the Creator has taken away."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)