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श्लोक 10.89.39  |
तदाह विप्रो विजयं विनिन्दन् कृष्णसन्निधौ ।
मौढ्यं पश्यत मे योऽहं श्रद्दधे क्लीबकत्थनम् ॥ ३९ ॥ |
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| अनुवाद |
| तब उस ब्राह्मण ने भगवान् श्री कृष्ण जी की उपस्थिति में अर्जुन का मज़ाक उड़ाया, "अरे देखो मैं कितना मूर्ख हूँ कि मैंने इस घमंडी नपुंसक पर भरोसा किया!" |
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| तब उस ब्राह्मण ने भगवान् श्री कृष्ण जी की उपस्थिति में अर्जुन का मज़ाक उड़ाया, "अरे देखो मैं कितना मूर्ख हूँ कि मैंने इस घमंडी नपुंसक पर भरोसा किया!" |
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