श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  10.89.29 
अहं प्रजा: वां भगवन् रक्षिष्ये दीनयोरिह ।
अनिस्तीर्णप्रतिज्ञोऽग्निं प्रवेक्ष्ये हतकल्मष: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
"हे प्रभु, मैं ऐसे संकटग्रस्त आप और आपकी पत्नी की संतानों की रक्षा करूँगा। यदि मैं यह वचन पूरा नहीं कर सका, तो मैं अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए अग्नि में प्रवेश करूँगा।"
 
"हे प्रभु, मैं ऐसे संकटग्रस्त आप और आपकी पत्नी की संतानों की रक्षा करूँगा। यदि मैं यह वचन पूरा नहीं कर सका, तो मैं अपने पाप का प्रायश्चित करने के लिए अग्नि में प्रवेश करूँगा।"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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