Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.89.24: हिंसा में खुशी पाने वाले और अपनी इंद्रियों को वश में न रख पाने वाले दुष्ट राजा की सेवा करने वाले नागरिकों को लगातार गरीबी और दुख का सामना करना पड़ता है।   |   bhagavat अध्याय 10.89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.89.24 
हिंसाविहारं नृपतिं दु:शीलमजितेन्द्रियम् ।
प्रजा भजन्त्य: सीदन्ति दरिद्रा नित्यदु:खिता: ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
हिंसा में खुशी पाने वाले और अपनी इंद्रियों को वश में न रख पाने वाले दुष्ट राजा की सेवा करने वाले नागरिकों को लगातार गरीबी और दुख का सामना करना पड़ता है।
 
Citizens who serve an evil king who finds pleasure in violence and cannot control his senses have to face constant poverty and misery.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)