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bhagavat 10.89.22: ब्राह्मण ने उस मृत शरीर को ले जाकर राजा उग्रसेन के दरबार के दरवाज़े पर रख दिया। फिर व्याकुल और दीन-हीन भाव से शोक प्रकट करते हुए, वह इस प्रकार बोला।   |   bhagavat अध्याय 10.89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 89: कृष्ण तथा अर्जुन द्वारा ब्राह्मण-पुत्रों का  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.89.22 
विप्रो गृहीत्वा मृतकं राजद्वार्युपधाय स: ।
इदं प्रोवाच विलपन्नातुरो दीनमानस: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने उस मृत शरीर को ले जाकर राजा उग्रसेन के दरबार के दरवाज़े पर रख दिया। फिर व्याकुल और दीन-हीन भाव से शोक प्रकट करते हुए, वह इस प्रकार बोला।
 
The Brahmin took the dead body and placed it at the door of King Ugrasen's court. Then, in a distressed and pitiable mood, he spoke in this manner while mourning.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)