Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.88.7: यह प्रश्न श्रीकृष्ण को प्रसन्न कर गया, जो राजा के मालिक और स्वामी हैं, जो सभी मनुष्यों को सर्वोच्च कल्याण प्रदान करने के उद्देश्य से यदुकुल में अवतरित हुए थे। भगवान ने इस प्रकार उत्तर दिया जैसा कि राजा ने उत्सुकता से सुना। | bhagavat अध्याय 10.88: वृकासुर से शिवजी की रक्षा । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स आह भगवांस्तस्मै प्रीत: शुश्रूषवे प्रभु: ।
नृणां नि:श्रेयसार्थाय योऽवतीर्णो यदो: कुले ॥ ७ ॥
अनुवाद
यह प्रश्न श्रीकृष्ण को प्रसन्न कर गया, जो राजा के मालिक और स्वामी हैं, जो सभी मनुष्यों को सर्वोच्च कल्याण प्रदान करने के उद्देश्य से यदुकुल में अवतरित हुए थे। भगवान ने इस प्रकार उत्तर दिया जैसा कि राजा ने उत्सुकता से सुना।
The king's master and Lord Sri Krishna, who had appeared in the Yadu clan for the purpose of providing ultimate benefit to all people, was pleased with this question. The Lord gave the following answer, which the king listened to with great interest.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥