| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ » अध्याय 88: वृकासुर से शिवजी की रक्षा » श्लोक 5 |
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| | | | श्लोक 10.88.5  | हरिर्हि निर्गुण: साक्षात् पुरुष: प्रकृते: पर: ।
स सर्वदृगुपद्रष्टा तं भजन् निर्गुणो भवेत् ॥ ५ ॥ | | | | | | अनुवाद | | किन्तु भगवान् हरि को भौतिक गुण छू भी नहीं सकते। वे सब कुछ देखने वाले, हमेशा से विद्यमान, साक्षी स्वरूप हैं, जो भौतिक प्रकृति से परे हैं। उनका भजन करने वाला भी उनके जैसा ही भौतिक गुणों से मुक्त हो जाता है। | | | | किन्तु भगवान् हरि को भौतिक गुण छू भी नहीं सकते। वे सब कुछ देखने वाले, हमेशा से विद्यमान, साक्षी स्वरूप हैं, जो भौतिक प्रकृति से परे हैं। उनका भजन करने वाला भी उनके जैसा ही भौतिक गुणों से मुक्त हो जाता है। | | ✨ ai-generated | | |
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