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श्लोक 10.88.4  |
ततो विकारा अभवन् षोडशामीषु कञ्चन ।
उपधावन् विभूतीनां सर्वासामश्नुते गतिम् ॥ ४ ॥ |
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| अनुवाद |
| उस मिथ्या अहंकार से विकार के रूप में सोलह तत्व पैदा हुए हैं। जब शिव का भक्त इन तत्वों में से किसी एक की भी पूजा करता है तो उसे उसी तत्व के संबंधित भोग्य ऐश्वर्य प्राप्त होता है। |
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| उस मिथ्या अहंकार से विकार के रूप में सोलह तत्व पैदा हुए हैं। जब शिव का भक्त इन तत्वों में से किसी एक की भी पूजा करता है तो उसे उसी तत्व के संबंधित भोग्य ऐश्वर्य प्राप्त होता है। |
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