श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 88: वृकासुर से शिवजी की रक्षा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.88.21 
देवं स वव्रे पापीयान् वरं भूतभयावहम् ।
यस्य यस्य करं शीर्ष्णि धास्ये स म्रियतामिति ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
[शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा]: जिस पापी वृक ने भगवान से जो वरदान माँगा, वह सभी जीवों के लिए बहुत ही भयावह था। वृक ने कहा, "मैं जिसके भी सिर पर अपना हाथ रखूँगा, उसकी मृत्यु हो जाएगी।"
 
[Shukadeva Goswami further said]: The boon that the sinful Vrik asked from God was terrifying for all living beings. The Vrik said, “Whoever's head I place my hand on should die.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)