श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 88: वृकासुर से शिवजी की रक्षा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.88.1 
श्रीराजोवाच
देवासुरमनुष्येषु ये भजन्त्यशिवं शिवम् ।
प्रायस्ते धनिनो भोजा न तु लक्ष्म्या: पतिं हरिम् ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
राजा परीक्षित ने कहा: वे देवता और दानव जो शिव भगवान की पूजा करते हैं, वोधन-संपदा तथा इंद्रिय भोगों का आनंद लेते हैं, जबकि लक्ष्मी नारायण भगवान की पूजा करने वाले ऐसा नहीं कर पाते।
 
राजा परीक्षित ने कहा: वे देवता और दानव जो शिव भगवान की पूजा करते हैं, वोधन-संपदा तथा इंद्रिय भोगों का आनंद लेते हैं, जबकि लक्ष्मी नारायण भगवान की पूजा करने वाले ऐसा नहीं कर पाते।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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