यो वै भारतवर्षेऽस्मिन् क्षेमाय स्वस्तये नृणाम् ।
धर्मज्ञानशमोपेतमाकल्पादास्थितस्तप: ॥ ६ ॥
अनुवाद
सृष्टि के प्रारंभ से ही नारायण ऋषि इस भारत भूमि पर मानवता के लोक और परलोक के लाभ के लिए धार्मिक कर्त्तव्यों का निर्वाह और आध्यात्मिक ज्ञान और आत्मसंयम का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए तपस्या कर रहे थे।
From the very beginning of the Kalpa, Narayan Rishi was performing tapasya in this land of India, fully performing the religious duties and giving ideal form to spiritual knowledge and self-control for the benefit of men in this world and the next.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥