एकदा गृहमानीय आतिथ्येन निमन्त्र्य तम् ।
श्रद्धयोपहृतं भैक्ष्यं बलेन बुभुजे किल ॥ ५ ॥
अनुवाद
एक दिन बलराम जी ने अर्जुन को अपने घर आमंत्रित अतिथि के रूप में बुलाया और अर्जुन ने बलराम जी ने आदरपूर्वक परोसे गए भोजन को ग्रहण किया।
One day Balarama brought him to his house as an invited guest and Arjuna accepted the food offered by Balarama respectfully.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती के स्पष्टीकरण से, यह समझा जाता है कि अपने सन्यासी भूमिका में अर्जुन ने वर्षा ऋतु के चार महीने के व्रत को अभी-अभी समाप्त किया था और अब वह फिर से गृहस्थों से आम निमंत्रण स्वीकार कर सकता था। इस प्रकार इस समय भगवान बलराम से मिलने जाने में किसी को भी कोई असामान्य मकसद पर संदेह नहीं होता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥