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bhagavat 10.86.44: श्रुतदेव ने कहा : ऐसा नहीं है कि केवल आज ही हमने परम पुरुष का दर्शन किया है, क्योंकि जब से उन्होंने अपनी शक्तियों से इस ब्रह्माण्ड को बनाया है और फिर अपने दिव्य रूप में उसमें प्रवेश किया है, तभी से हम उनका सान्निध्य पाते रहे हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  10.86.44 
श्रुतदेव उवाच
नाद्य नो दर्शनं प्राप्त: परं परमपूरुष: ।
यर्हीदं शक्तिभि: सृष्ट्वा प्रविष्टो ह्यात्मसत्तया ॥ ४४ ॥
 
 
अनुवाद
श्रुतदेव ने कहा : ऐसा नहीं है कि केवल आज ही हमने परम पुरुष का दर्शन किया है, क्योंकि जब से उन्होंने अपनी शक्तियों से इस ब्रह्माण्ड को बनाया है और फिर अपने दिव्य रूप में उसमें प्रवेश किया है, तभी से हम उनका सान्निध्य पाते रहे हैं।
 
Shrutadeva said: It is not that we have seen the Supreme Being only today, because ever since He created this universe with His powers and entered into it in His divine form, we have been enjoying His proximity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)