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bhagavat 10.86.41: उसने आराम से मिल जाने वाली शुभ चीजों से जैसे- फल, उशीर, शुद्ध अमृत जैसे पानी, सुगंधित मिट्टी, तुलसी के पत्ते, कुशा घास और कमल के फूल चढ़ाकर उनकी पूजा की। फिर उसने उन्हें वह भोजन खिलाया जो सत्वगुण को बढ़ाता था।   |   bhagavat अध्याय 10.86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  10.86.41 
फलार्हणोशीरशिवामृताम्बुभि-
र्मृदा सुरभ्या तुलसीकुशाम्बुजै: ।
आराधयामास यथोपपन्नया
सपर्यया सत्त्वविवर्धनान्धसा ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
उसने आराम से मिल जाने वाली शुभ चीजों से जैसे- फल, उशीर, शुद्ध अमृत जैसे पानी, सुगंधित मिट्टी, तुलसी के पत्ते, कुशा घास और कमल के फूल चढ़ाकर उनकी पूजा की। फिर उसने उन्हें वह भोजन खिलाया जो सत्वगुण को बढ़ाता था।
 
He worshipped them by offering auspicious materials that were easily available, such as fruits, ushir, pure nectar-like water, fragrant soil, basil leaves, kusha grass and lotus flowers. Then he served them food that increases the mode of goodness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)