Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.86.4: अपने प्रयोजन की सिद्धि के लिए वे वहाँ वर्षा ऋतु तक ठहरे रहे। बलराम तथा अन्य नगर निवासियों ने उन्हें न पहचानते हुए तरह-तरह से उनका सम्मान और सत्कार किया। | bhagavat अध्याय 10.86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्र वै वार्षितान् मासानवात्सीत् स्वार्थसाधक: ।
पौरै: सभाजितोऽभीक्ष्णं रामेणाजानता च स: ॥ ४ ॥
अनुवाद
अपने प्रयोजन की सिद्धि के लिए वे वहाँ वर्षा ऋतु तक ठहरे रहे। बलराम तथा अन्य नगर निवासियों ने उन्हें न पहचानते हुए तरह-तरह से उनका सम्मान और सत्कार किया।
To fulfil his purpose, he stayed there throughout the rainy season. Balarama and the other residents of the city, without recognising him, honoured and honoured him in every possible way.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥