Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.86.32: आपने कहा है, "मुझे अपने निष्कपट भक्त की तुलना में न तो अनन्त, देवी श्री और न ही अजन्मे ब्रह्मा प्रिय हैं।" अपने ही शब्दों को सत्य साबित करने के लिए, अब आपने खुद को हमारी आँखों के सामने प्रकट कर दिया है। | bhagavat अध्याय 10.86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आपने कहा है, "मुझे अपने निष्कपट भक्त की तुलना में न तो अनन्त, देवी श्री और न ही अजन्मे ब्रह्मा प्रिय हैं।" अपने ही शब्दों को सत्य साबित करने के लिए, अब आपने खुद को हमारी आँखों के सामने प्रकट कर दिया है।
You have said, “Neither the Ananta, Devi Sri, nor the unborn Brahma is more dear to Me than Your exclusive devotee.” To prove Your own words true, You have now revealed Yourself before our eyes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥