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bhagavat 10.86.16: इसी प्रकार, हे परीक्षित, मिथिला के वंश से आये उस राज्य के शासक, बहुलाश्व, मिथ्या अहंकाररहित थे। ये दोनों ही भक्त भगवान अच्युत को अत्यंत प्रिय थे।   |   bhagavat अध्याय 10.86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 86: अर्जुन द्वारा सुभद्रा-हरण तथा कृष्ण द्वारा अपने भक्तों को आशीर्वाद दिया जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.86.16 
तथा तद्राष्ट्रपालोऽङ्ग बहुलाश्व इति श्रुत: ।
मैथिलो निरहम्मान उभावप्यच्युतप्रियौ ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार, हे परीक्षित, मिथिला के वंश से आये उस राज्य के शासक, बहुलाश्व, मिथ्या अहंकाररहित थे। ये दोनों ही भक्त भगवान अच्युत को अत्यंत प्रिय थे।
 
O Parikshit, similarly the ruler of that kingdom from the Mithila dynasty, whose name was Bahulasva, was free from false ego. Both these devotees were very dear to Lord Achyuta.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)