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bhagavat 10.85.53: देवी देवकी जब अपने खोए हुए बच्चों से मिलीं तभी उन्हें स्मरण हुआ कि उनके दूध में ज़हर भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि कंस ने उनसे कहा है कि उनके आठवें बच्चे के जन्म पर उसे मार डाला जाए। देवकी की बात सुनकर वसुदेव ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह बच्चे को कंस से बचा लेंगे। वसुदेव ने देवकी के स्तनों से दूध को निचोड़कर उसे ज़हरमुक्त कर दिया ताकि वह बच्चे को पिला सकें। इसके बाद देवकी ने कृष्ण को दूध पिलाया।   |   bhagavat अध्याय 10.85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 85: कृष्ण द्वारा वसुदेव को उपदेश दिया जाना तथा देवकी-पुत्रों की वापसी  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  10.85.53 
तान् द‍ृष्ट्वा बालकान् देवी पुत्रस्‍नेहस्‍नुतस्तनी ।
परिष्वज्याङ्कमारोप्य मूर्ध्‍न्यजिघ्रदभीक्ष्णश: ॥ ५३ ॥
 
 
अनुवाद
देवी देवकी जब अपने खोए हुए बच्चों से मिलीं तभी उन्हें स्मरण हुआ कि उनके दूध में ज़हर भरा हुआ है। उन्होंने बताया कि कंस ने उनसे कहा है कि उनके आठवें बच्चे के जन्म पर उसे मार डाला जाए। देवकी की बात सुनकर वसुदेव ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह बच्चे को कंस से बचा लेंगे। वसुदेव ने देवकी के स्तनों से दूध को निचोड़कर उसे ज़हरमुक्त कर दिया ताकि वह बच्चे को पिला सकें। इसके बाद देवकी ने कृष्ण को दूध पिलाया।
 
When the goddess Devaki saw her lost children, she was so overcome with affection that her breasts began to flow with milk. She embraced them and held them on her lap and repeatedly sniffed their heads.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)