कीर्तिमन्तं प्रथम-जं
कंसयानकदुंदुभिः
अर्पयाम आस कृच्छ्रेण
सोअनृताति-विह्वलः
"कांस को वचन भंग करने के भय से वासुदेव बहुत परेशान थे। इस प्रकार, बहुत कष्ट झेलते हुए उन्होंने अपने वचन को निभाने के लिए अपने ज्येष्ठ पुत्र कीर्तिमान को कांस को सौंप दिया।"
