उस अनुचित कार्य के चलते, वे तुरंत आसुरी योनि में प्रवेश कर गए और इस तरह उन्होंने हिरण्यकशिपु के पुत्रों के रूप में जन्म लिया। देवी योगमाया ने उन सभी को हिरण्यकशिपु से छीन लिया और फिर वे देवकी के गर्भ से दुबारा जन्मे। इसके बाद हे राजा, कंस ने उन सभी की हत्या कर दी। देवकी आज भी उन्हें अपने पुत्र मानकर उनका शोक करती हैं। मरीचि के वही पुत्र अब आपके साथ यहाँ रह रहे हैं।
For that wrongful act, they immediately entered the demoniac womb and were thus born as the sons of Hiranyakashipu. Goddess Yogamaya took them all away from Hiranyakashipu and they were born again from Devaki's womb. O King, Kamsa then killed them all. Devaki even today mourns remembering those sons of hers. Those very sons of Marichi are now living here with you.
तात्पर्य
आचार्य श्रीधर स्वामी और विश्वनाथ चक्रवर्ती ने लिखा है कि हिरण्यकशिपु से मरीचि के छः पुत्रों को लेने के बाद, प्रभु कृष्ण की योग-माया ने पहले उन्हें एक और महान असुर कालनेमि की संतान के रूप में एक और जीवन से गुजारा और फिर अंततः उन्हें देवकी के गर्भ में स्थानांतरित किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥