हे सब प्राणियों के स्वामी, कृपा करके हमें बताएं कि हम क्या करें जिससे हम पापों से मुक्त हो सकें। हे मालिक, जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक आपके आदेश का पालन करता है, उसे सामान्य वैदिक कर्मकांडों का पालन नहीं करना चाहिए।
O Lord of all subordinate beings, kindly tell us what we should do and thus free us from all sins. O Lord, a person who follows your order with devotion is not required to perform the normal Vedic rituals.
तात्पर्य
आचार्य लोग बलि के विचारों को इस प्रकार समझाते हैं। मुक्ति की तुरंत प्राप्ति के लिए अपने अनुरोध के बहुत साहसी हो सकने की संभावना पर चिंतन करते हुए बलि महाराज ये मानते हैं कि पहले उन्हें पर्याप्त रूप से शुद्ध होने की आवश्यकता होगी। किसी भी स्थिति में, वे सोचते हैं, भगवान कृष्ण और भगवान बलराम निश्चित ही किसी विशिष्ट उद्देश्य से उनके पास आए होंगे; यदि वह प्रभुओं के आदेश को प्राप्त कर उसे पूरा कर सकते हैं, तो वह उनके लिए शुद्ध होने का सबसे अच्छा अवसर होगा। वास्तव में, जैसा कि बलि बताते हैं, एक भक्त, जो भगवान के व्यक्तित्व के निर्देशों के अनुसार काम कर रहा है, को वेदों द्वारा कहे गए बलिदान संबंधी आदेशों और निषेधाज्ञाओं का पालन करने की आवश्यकता नहीं है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥